मयूरी त्यागी...मैं ना जानूं कौन हूं मैं, फिर भी हरदम मौन हूं मैं,
मैंने दिल से सिर्फ प्यार मांगा, हर बार ही मिला उससे धोखा
खुद से बातें करती चलती रही मैं, सवाल आया-किसी ने क्यों नहीं रोका,
कुछ धुंधले चेहरों को भूल रही हूं, बचपन की यादों में झूल रही हूं,
मैं ना जानूं कौन हूं मैं, फिर भी हरदम मौन हूं मैं,
जीवन में आया था प्यार का एक सैलाब, अकस्मात् बंद हो गई इक अधूरी सी किताब,
अब दोस्ती से ही जिंदा हूं मैं बिसरी यादों का इक पुलिंदा हूं मैं,
दोस्त की आंख का नीर अब मेरी आंख से बहे,
इस निमोही-जालिम जमाने को मयूरी यही बात कहे,
मैं ना जानूं कौन हूं मैं, फिर भी हरदम मौन हूं मैं,
सपनों के पंख फैलाकर आसमां में आशियां बनाना चाहती हूं,
मंजिल और दूरी का अदना सा ये फासला मिटाना चाहती हूं,
मंजिल की चाह में मेरा मन अकेला ही खड़ा है,
दुनिया की भीड़ में खुद को मनाने पे अड़ा है,
मैं ना जानूं कौन हूं मैं, फिर भी हरदम मौन हूं मैं,
आजकल एक शख्स की तलाश में हूं मैं,
ढूंढ़ती हो जिंदगी को, इक ऐसी लाश हूं मैं
8 comments:
very nice
चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है ।
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है ।
लिखते रहिए लिखने वाले की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल,शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका भी देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
स्वागत है आपका, शुभकामनायें… एक अर्ज है कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दीजिये, अभी हिन्दी ब्लॉग जगत में इसकी आवश्यकता नहीं है… धन्यवाद
मैं ना जानूं कौन हूं मैं, फिर भी हरदम मौन हूं मैं,
आजकल एक शख्स की तलाश में हूं मैं,
ढूंढ़ती हो जिंदगी को, इक ऐसी लाश हूं मैं
सुन्दर अभिव्यक्ति एक उत्कृष्ट रचना ........
खुद की पहेचान खोजती हुई न जाने कौन से सवालों मे घिरी हुई ये कल्पना है या कुछ और जो भी है बहुत ही खुबसूरत एहसास है
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है आने के लिए
आप
๑۩۞۩๑वन्दना
शब्दों की๑۩۞۩๑ इस पर क्लिक कीजिए
आभार...अक्षय-मन
आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है। आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करें। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
wah jee wah. bahut hee jandar. narayan narayan
चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है ।
शुभकामनायें…
अब दोस्ती से ही जिंदा हूं मैं बिसरी यादों का इक पुलिंदा हूं मैं,मैं ना जानूं कौन हूं मैं, फिर भी हरदम मौन हूं मैं.
खूब लिखा है आपने. स्वागत है ब्लॉग परिवार और मेरे ब्लॉग पर भी.
खूबसूरत. जारी रहें. शुभकामनाएं.
मेरे ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं.
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