Friday, 25 February 2011
Sunday, 26 December 2010
Monday, 11 October 2010
Thursday, 15 January 2009
विडंबना
Sunday, 30 November 2008
दो नैना
दूर खड़े वो नैना, जागे पूरी रैना,
Friday, 21 November 2008
कौन हूं मैं
मयूरी त्यागी...मैं ना जानूं कौन हूं मैं, फिर भी हरदम मौन हूं मैं,
मैंने दिल से सिर्फ प्यार मांगा, हर बार ही मिला उससे धोखा
खुद से बातें करती चलती रही मैं, सवाल आया-किसी ने क्यों नहीं रोका,
कुछ धुंधले चेहरों को भूल रही हूं, बचपन की यादों में झूल रही हूं,
मैं ना जानूं कौन हूं मैं, फिर भी हरदम मौन हूं मैं,
जीवन में आया था प्यार का एक सैलाब, अकस्मात् बंद हो गई इक अधूरी सी किताब,
अब दोस्ती से ही जिंदा हूं मैं बिसरी यादों का इक पुलिंदा हूं मैं,
दोस्त की आंख का नीर अब मेरी आंख से बहे,
इस निमोही-जालिम जमाने को मयूरी यही बात कहे,
मैं ना जानूं कौन हूं मैं, फिर भी हरदम मौन हूं मैं,
सपनों के पंख फैलाकर आसमां में आशियां बनाना चाहती हूं,
मंजिल और दूरी का अदना सा ये फासला मिटाना चाहती हूं,
मंजिल की चाह में मेरा मन अकेला ही खड़ा है,
दुनिया की भीड़ में खुद को मनाने पे अड़ा है,
मैं ना जानूं कौन हूं मैं, फिर भी हरदम मौन हूं मैं,
आजकल एक शख्स की तलाश में हूं मैं,
ढूंढ़ती हो जिंदगी को, इक ऐसी लाश हूं मैं
Friday, 26 September 2008
मेरी मां...
दिनभर दौड़े-भागे, चौका-चूल्हा संभाले,पसीने से तर नजर आती मेरी मां
मेरी सलीके से भरी आवारगी पर,
सबकुछ जान कर भी मुस्कराती मेरी मां
जलता हूं जब भी अपनेआप में,
मेरे आंसू अपनी आंखों से बहाती मेरी मां
किताबों में जहां, कहां दिखता है,
अनुभव के चश्मे से दुनिया दिखाती मेरी मां
अंगुली पकड़कर चलना सीखा था वालिद की,
समाज के साथ चलना सिखाती मेरी मां
सीखता रहूं ताउम्र उन्हीं से मैं,
मेरे जीने का आखिरी बहाना मेरी मां



